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हिंदी कार्यशाला [ 05 जून 2026] :

दिनांक: 05 जून 2026
विषय: राजभाषा हिंदी के प्रभावी कार्यान्वयन एवं राजभाषा संबंधी विभिन्न प्रावधानों पर हिंदी कार्यशाला

दिनांक 05 जून 2026 को कार्यालय में हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), खड़गपुर के वरिष्ठ हिंदी अधिकारी डॉ. राजीव कुमार रावत उपस्थित रहे। कार्यशाला का उद्देश्य कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग को प्रोत्साहित करना तथा राजभाषा संबंधी नियमों, लक्ष्यों एवं प्रावधानों के व्यावहारिक पक्ष से प्रतिभागियों को अवगत कराना था। कार्यशाला का आयोजन दो सत्रों में किया गया। दोनों सत्रों में डॉ. राजीव कुमार रावत ने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की तथा प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं एवं प्रश्नों का समाधान किया।

प्रथम सत्र :

प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता द्वारा राजभाषा के वार्षिक लक्ष्यों एवं उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि वार्षिक कार्यक्रम के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्यों को केवल सांख्यिकीय उपलब्धि के रूप में न देखकर कार्यालय के दैनिक कार्यों में हिंदी के वास्तविक एवं सहज प्रयोग से जोड़ना आवश्यक है। राजभाषा विभाग द्वारा संघ के शासकीय कार्यों में हिंदी के प्रयोग के लिए वार्षिक कार्यक्रम एवं संबंधित मूल्यांकन व्यवस्था निर्धारित की जाती है।

इसके पश्चात् उन्होंने कार्यशाला के आयोजन के उद्देश्य एवं अपेक्षित परिणाम पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यशाला का उद्देश्य केवल हिंदी भाषा का प्रशिक्षण देना नहीं है, बल्कि अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कार्यालयीन कार्यों में हिंदी का प्रयोग करने के लिए व्यावहारिक रूप से सक्षम बनाना है।

मुख्य वक्ता ने इस विषय पर भी चर्चा की कि सरकार केंद्रीय संस्थानों से राजभाषा के संबंध में क्या अपेक्षा रखती है। उन्होंने कार्यालयीन पत्राचार, टिप्पण, प्रारूपण, रिपोर्ट, आदेश एवं अन्य प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने तथा राजभाषा संबंधी निर्धारित लक्ष्यों के अनुपालन पर बल दिया।

सत्र के दौरान राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 3(3) पर विशेष रूप से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि धारा 3(3) के अंतर्गत आने वाले निर्धारित दस्तावेजों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में जारी किया जाना आवश्यक है। इस क्रम में धारा 3(3) के 14 प्रकार के दस्तावेजों के बारे में विस्तार से चर्चा की गई तथा यह बताया गया कि ऐसे दस्तावेजों को द्विभाषी रूप में तैयार एवं जारी करने में संबंधित शाखाओं तथा अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। राजभाषा नियम, 1976 के नियम 6 के अनुसार ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारी का दायित्व है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि दस्तावेज हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में तैयार, निष्पादित और जारी किए गए हों।

द्वितीय सत्र :

द्वितीय सत्र में संसदीय राजभाषा समिति के संभावित निरीक्षण/आगमन के समय किए जाने वाले कार्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य वक्ता ने बताया कि ऐसे अवसरों पर कार्यालय को राजभाषा संबंधी अभिलेखों, प्रगति, कार्यान्वयन तथा निर्धारित लक्ष्यों की स्थिति से संबंधित जानकारी व्यवस्थित रूप से तैयार रखनी चाहिए।

इस दौरान कार्यालय प्रमुख के समक्ष आने वाली विभिन्न चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। विशेष रूप से राजभाषा संबंधी लक्ष्यों की पूर्ति, कार्यालयीन कार्यों में हिंदी का प्रयोग, द्विभाषी दस्तावेजों की उपलब्धता, पत्राचार, रिपोर्ट तथा राजभाषा संबंधी अभिलेखों के समुचित रख-रखाव जैसे विषयों पर व्यावहारिक जानकारी दी गई।

इसके बाद हिंदी के कार्यसाधक ज्ञान के संबंध में चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि कार्यालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों में हिंदी के कार्यसाधक ज्ञान को बढ़ाना तथा उन्हें हिंदी में अपना दैनिक कार्यालयीन कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करना राजभाषा कार्यान्वयन का महत्वपूर्ण पक्ष है। राजभाषा नियम, 1976 में “हिंदी में कार्यसाधक ज्ञान” की व्यवस्था भी निर्धारित है।
कार्यशाला में आधुनिक हिंदी तकनीकी एवं डिजिटल संसाधनों की भी जानकारी दी गई। इस क्रम में निम्नलिखित संसाधनों/पोर्टलों पर चर्चा हुई—शब्दसिंधु ,भारतीय भाषा अनुभाग ,लीला (LiLa) , बालेंदु/बालिंदु पोर्टल

अंत में राजभाषा वार्षिक कार्यक्रम, 1976 से संबंधित विषयों पर चर्चा की गई तथा राजभाषा कार्यान्वयन के लिए निर्धारित कार्यक्रमों, लक्ष्यों और उनके अनुपालन के महत्व को समझाया गया। वर्तमान में भी राजभाषा विभाग द्वारा वार्षिक कार्यक्रम एवं वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट प्रकाशित की जाती हैं।

तिमाही हिंदी कार्यशाला प्रतिवेतन [19 मार्च 2026 ] :

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तिमाही हिंदी कार्यशाला प्रतिवेतन
दिनांक: 19.03.2026
स्थान: शैक्षणिक ब्लॉक, आईआईएम संबलपुर

शैक्षणिक ब्लॉक, आईआईएम संबलपुर में 19 मार्च 2026 को एक दिवसीय ऑनलाइन तिमाही हिंदी कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार और तकनीकी उपयोग को बढ़ावा देना था।
प्रथम सत्र (पूर्वाह्न 11:00 – दोपहर 12:30)
कार्यक्रम की शुरुआत श्री अंजार जमाल, कार्यालय सहायक-पुस्तकालय के स्वागत भाषण से हुई। प्रो. धरेन पांडेय ने मुख्य वक्ता डॉ. नीलेश कुमार, विभागाध्यक्ष एवं सहायक प्रोफेसर, एस.बी.एस.एस. कॉलेज, बेगूसराय, बिहार का परिचय दिया और उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। डॉ. नीलेश कुमार ने भाषा, मातृभाषा और राजभाषा के बीच के अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने हिंदी साहित्य की प्रसिद्ध कहानी ‘दाज्यू’ का उल्लेख करते हुए भाषा की संवेदनाओं को समझाया। इसके साथ भाषा के विभिन्न प्रकारों, प्रारूपों और उनके व्यावहारिक उपयोग पर विस्तार से चर्चा की।
द्वितीय सत्र (अपराह्न 01:30 – 03:00)

दूसरे सत्र के मुख्य वक्ता डॉ. राजीव कुमार रावत, वरिष्ठ हिंदी अधिकारी, आईआईटी खड़गपुर थे। उन्होंने “राजभाषा कार्यान्वयन में उन्नत उपकरणों की भूमिका” विषय पर व्याख्यान दिया। तकनीकी जानकारी के बारे में बताते हुए डॉ. रावत ने आधुनिक उपकरणों जैसे ओसीआर, अनुवादिनी, भाषिणी, indiatyping.com और shabdakosh.com के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैसे ये टूल्स सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रयोग को सरल और सटीक बना सकते हैं।
इस कार्यशाला में प्रतिभागियों ने डिजिटल माध्यमों से हिंदी के प्रयोग को लेकर गहरी रुचि दिखाई।
श्री अमृत फाल्गुनी महांति, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन कर कार्यशाला का समापन किया गया।

विश्व हिंदी दिवस [10 जनवरी 2026]:

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भारतीय प्रबंधन संस्थान संबलपुर ने 10 जनवरी 2026 को अधिकारी और कर्मचारियों की भागीदारी के साथ विश्व हिंदी दिवस मनाया। यह कार्यक्रम हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने और इसकी वैश्विक महत्ता को उजागर करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत श्री अमृत पी. मोहंती, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, द्वारा स्वागत भाषण के साथ हुई, जिसके बाद दीप प्रज्वलन समारोह संपन्न हुआ। प्रो. महादेव जैसवाल, निदेशक, आईआईएम संबलपुर ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया और संचार को सशक्त बनाने तथा भारतीय संस्कृति के संरक्षण में हिंदी की भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में क्विज़ प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा और प्रमाणपत्र वितरण भी शामिल था, जिसमें विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिता में सक्रिय भागीदारी की सराहना की गई।

कार्यक्रम का समापन श्री धनंजय देवांगन, एओ (अकादमिक्स) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कुल मिलाकर, यह आयोजन गरिमापूर्ण और अर्थपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ, जो संस्थान की हिंदी के प्रचार और प्रभावी उपयोग के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

हिंदी कार्यशाला [27 दिसंबर 2025] :

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भारतीय प्रबंधन संस्थान संबलपुर ने 27 दिसंबर 2025 को कक्षा A02 में हिंदी कार्यशाला का विधिवत आयोजन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो. धरेन कुमार पांडेय द्वारा विषय-प्रस्तावना तथा मुख्य वक्ता डॉ. कुमार वरुण, सहायक प्राध्यापक, हिंदी विभाग, अनुग्रह नारायण कॉलेज, पटना के औपचारिक परिचय के साथ हुआ। इसके पश्चात डॉ. कुमार वरुण ने “हिंदी भाषा के अनुप्रयोग एवं चुनौतियाँ” विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के प्रयोग, उसकी व्यावहारिक उपयोगिता तथा समकालीन चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

मध्यान्ह भोजनावकाश के उपरांत प्रो. धरेन कुमार पांडेय द्वारा द्वितीय वक्ता श्री संतोष गुप्ता, अनुसंधान अधिकारी (कार्यान्वयन), राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार का परिचय कराया गया। तत्पश्चात श्री संतोष गुप्ता ने “राजभाषा कार्यान्वयन एवं वर्तमान स्थिति” विषय पर व्याख्यान देते हुए राजभाषा अधिनियम एवं नियमों, निर्धारित लक्ष्यों तथा प्रभावी कार्यान्वयन की वर्तमान स्थिति पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम का समापन श्री अमृत मोहंती द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसके उपरांत अपराह्न चाय का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के प्रभावी प्रयोग एवं जागरूकता को बढ़ावा देने की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी एवं सफल रही।

हिंदी पखवाडा समारोह [2025] :

भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) संबलपुर में प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग को प्रोत्साहित करने तथा हमारी समृद्ध सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विरासत के उत्सव के रूप में दिनांक 16/09/2025 से 30/09/2025 तक हिंदी पखवाड़ा 2025 का आयोजन किया गया।

हिंदी पखवाड़ा का उद्घाटन निदेशक प्रो. महादेव जायसवाल द्वारा दीप प्रज्वलन एवं भारत सरकार के माननीय शिक्षा मंत्री के संदेश वाचन के साथ किया गया। अपने उद्बोधन में उन्होंने सभी सरकारी कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग पर बल दिया तथा हिंदी के महत्व और भारत को एकता के सूत्र में पिरोने में उसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों को हिंदी पखवाड़ा के दौरान आयोजित कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता हेतु प्रेरित किया। इस अवसर पर कुछ कर्मचारियों ने अपनी कविताओं का पाठ भी प्रस्तुत किया। उद्घाटन समारोह का समापन मुख्य प्रशासनिक अधिकारी श्री अमृत पी. मोहंती के धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।

हिंदी पखवाड़ा के दौरान कविता-पाठ, वाद-विवाद, अनुवाद, निबंध लेखन तथा प्रश्नोत्तरी जैसी विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें प्रशासनिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

सप्ताह भर आयोजित विविध प्रतियोगिताओं के उपरांत आईआईएम संबलपुर में हिंदी पखवाड़ा 2025 का समापन समारोह बड़े ही हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ हिंदी राजभाषा समिति के नोडल अधिकारी प्रो. धरेन कुमार पाण्डेय के स्वागत भाषण से हुआ। प्रो. पाण्डेय ने इस अवसर पर अपनी स्वरचित कविता भी प्रस्तुत की।

इसके पश्चात प्रो. दिप्तिरंजन महापात्र, डीन (शैक्षणिक), ने हिंदी के महत्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए इस बात पर जोर दिया कि हिंदी का प्रयोग केवल हिंदी पखवाड़ा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे नियमित प्रशासनिक कार्यों में भी अपनाया जाना चाहिए।

समापन समारोह में प्रो. महापात्र द्वारा प्रतियोगिताओं के विजेताओं की घोषणा की गई तथा उन्हें प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। अंत में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी श्री अमृत पी. मोहंती ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

हिंदी कार्यशाला [30 जून 2025] :

 

दिनांक  30  जून 2025 को भारतीय प्रबंध संस्थान संबलपुर में “राजभाषा हिंदी का प्रसार: चुनौतियाँ, संभावनाएँ एवं कार्यालयीन कार्यों में यूनिकोड सहित हिंदी का अनुप्रयोग” विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य कार्यालयीन कार्यों में हिन्दी के प्रभावी उपयोग और यूनिकोड के अनुप्रयोग को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम सुचारु रूप से संपन्न हुआ और इसमें प्रशासनिक अधिकारीयों तथा कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यशाला का शुभारंभ सुश्री श्रद्धा सिंह (सदस्य, राजभाषा समिति) द्वारा सभी के स्वागत से हुआ, जिसके पश्चात प्रो. धरेन कुमार पाण्डेय (नोडल अधिकारी, हिंदी राजभाषा एवं सहायक प्राध्यापक) ने विषय प्रवेश कराते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों को रेखांकित किया। कार्यशाला में डॉ. परम् प्रकाश राय (वरिष्ठ सहायक प्राध्यापक, मगध विश्वविद्यालय) ने “राजभाषा हिन्दी का प्रसार: चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ” विषय पर हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आने वाली व्यावहारिक बाधाओं और उनके समाधानों पर विस्तृत चर्चा की, जबकि डॉ. वंदना भारती (वरिष्ठ सहायक प्राध्यापिका, पूर्णियां विश्वविद्यालय) ने “कार्यालय में राजभाषा हिन्दी एवं यूनिकोड का अनुप्रयोग” विषय पर प्रौद्योगिकी के माध्यम से हिन्दी के डिजिटल उपयोग, विशेष रूप से यूनिकोड तकनीक द्वारा कार्यालयीन कार्यों को सरल बनाने के व्यावहारिक तरीकों को प्रदर्शित किया। दोनों वक्ताओं ने अपने-अपने विषयों पर गहन जानकारी प्रदान कर प्रतिभागियों को लाभान्वित किया। कार्यशाला के समापन पर श्री अमृत पी. मोहन्ती (सदस्य, राजभाषा समिति एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी) ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ सभी प्रतिभागियों, वक्ताओं और आयोजक टीम की सराहना की। यह कार्यशाला राजभाषा हिन्दी के प्रयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी। भारतीय प्रबंध संस्थान संबलपुर भविष्य में ऐसे और आयोजन करने के लिए प्रतिबद्ध है।हहंदी पखवाडा समारोह 2025 की ररपोर्ट

हिंदी कार्यशाला [28 फरवरी 2025] :

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दिनांक 28 फरवरी 2025 को सभी प्रशासनिक कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। राजभाषा विभाग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के निदेशक श्री जगदीश राम पौरी इस कार्यशाला के मुख्य वक्ता थे, जिन्होंने राजभाषा नीति एवं उसके कार्यान्वयन पर विस्तार से व्याख्यान दिया। संवादात्मक सत्र के माध्यम से उन्होंने प्रतिभागियों द्वारा उठाए गए सभी प्रश्नों का समाधान किया।

इस कार्यशाला में राजभाषा विभाग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की सहायक निदेशक श्रीमती रेखा कुमारी तथा कनिष्ठ अनुवाद अधिकारी श्रीमती नीतू कुमारी भी उपस्थित थीं।

कार्यशाला का समन्वय भारतीय प्रबंध संस्थान संबलपुर की राजभाषा समिति द्वारा किया गया।

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